एनजीटी के आदेशों को लगा झटका, नहीं गिरेंगे कसौली के...

एनजीटी के आदेशों को लगा झटका, नहीं गिरेंगे कसौली के...

RM | June 29, 2017 | Thurssday


शिमला : नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने गत 30 और 31 मई को कसौली के नौ होटलों के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे और साथ ही होटलों पर जुर्माना भी लगाया था। होटलों ने आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसमे से तीन को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने होटलों की याचिकाओं पर नोटिस भी जारी किया है। हालांकि दो होटलों के मामलों में कोर्ट ने अंतरिम रोक का आदेश नहीं दिया है, सिर्फ उनकी याचिकाओं पर नोटिस भर जारी किया है।

बुधवार को कुछ होटलों की ओर से वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाईऔर न्यायमूर्ति एएम सप्रे व न्यायमूर्ति एसके कौल की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष एनजीटी के आदेश का विरोध किया। वकीलों ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता होटलों ने हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (एमेंडमेंट) एक्ट 2016 के तहत अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए आवेदन कर रखा है। उनका आवेदन सरकार के पास लंबित है, लेकिन फिलहाल हाई कोर्ट ने एमेंडमेंट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले पर अंतरिम रोक लगा रखी है।

संशोधन अधिनियम के तहत अवैध निर्माण पर विचार का अधिकार राज्य सरकार को है न कि एनजीटी को। पीठ ने दलीलें सुनने के बाद एनजीटी के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और याचिका में प्रतिपक्षी बनाए पक्षकारों को नोटिस जारी किया। हालांकि दो होटलों पाइन व्यू और नील गिरि रिसोर्ट के मामले में कोर्ट ने अंतरिम रोक आदेश देने से इन्कार कर दिया, लेकिन इन दोनों की याचिकाओं पर भी कोर्ट विचार करेगा और कोर्ट ने याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए 11 जुलाई तक जवाब मांगा है।


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